स्त्री जीवन और सामाजिक विद्रूपताओं का प्रभावशाली मंचन: ‘वेलकम स्वागत है’ ने दर्शकों को किया भावविभोर

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स्त्री जीवन और सामाजिक विद्रूपताओं का प्रभावशाली मंचन: ‘वेलकम स्वागत है’ ने दर्शकों को किया भावविभोर

हरिद्वार। हरिद्वार में आयोजित हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान थिएटर सेल, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा स्त्री जीवन की जटिलताओं और उससे जुड़ी सामाजिक विद्रूपताओं को रेखांकित करते हुए ‘वेलकम स्वागत है’ नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और उन्हें स्त्री जीवन से जुड़े संवेदनशील प्रश्नों पर गंभीर चिंतन के लिए विवश कर दिया।

उल्लेखनीय है कि यह नाटक राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत है तथा देश के विभिन्न हिस्सों में इसका सफल मंचन हो चुका है। हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल में यह नाटक का छठा मंचन था।

नाटक के लेखक एवं निर्देशक डॉ. हितेंद्र गोयल ने बताया कि इस प्रस्तुति के माध्यम से स्त्री जीवन की त्रासदी,लैंगिक संवेदनशीलता, स्त्री–पुरुष समानता और लैंगिक विभेद जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर जन-जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम है और ‘वेलकम स्वागत है’ इसी उद्देश्य को लेकर निरंतर मंचित किया जा रहा है।

फेस्टिवल में उपस्थित दर्शकों ने नाटक को अत्यंत सराहा और सभी कलाकारों के अभिनय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। फेस्टिवल के निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि हरिद्वार में इस प्रकार का यह पहला नाट्य मंचन है। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल के माध्यम से रंगकर्म को शहर से जोड़ने का प्रयास किया गया है और भविष्य में भी विभिन्न सामाजिक विषयों पर नाटकों व रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।

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